नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयाँ ने कहा है कि जजों का ट्रांसफ़र और नियुक्ति न्यायपालिका का आंतरिक विषय है और इसमें केंद्र सरकार का कोई हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं हो सकता।
पुणे के एक लॉ कॉलेज में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी जज को सिर्फ़ इसलिए एक हाई कोर्ट से दूसरे हाई कोर्ट भेजा जाना चाहिए क्योंकि उसने सरकार के ख़िलाफ़ कोई असहज आदेश दिया हो। उनके मुताबिक़, ऐसी कार्रवाई न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
जस्टिस भुइयाँ ने कहा, “जजों की नियुक्ति और तबादले पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। केंद्र सरकार यह तय नहीं कर सकती कि किसी जज का तबादला होना चाहिए या नहीं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का दख़ल न सिर्फ़ न्यायपालिका को कमज़ोर करता है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार पर भी प्रतिकूल असर डालता है।










