चीनी वैज्ञानिकों का ‘करिश्मा’: इंसान के बाल जितनी पतली धुलने वाली चिप बनाई

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जानें किस काम आएगी?

बीजिंग: चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा फाइबर चिप बनाया है, जो इंसान के बाल जितना पतला है। इसे ३० इंच तक खींचा जा सकता है। १५ टन के ट्रक के नीचे दबने के बाद भी यह चिप काम करता है। छोटा होने के बाद भी इसमें हजारों इलेक्ट्रॉनिक सर्किट लगे होते हैं।
एक बार फिर चीनी वैज्ञानिकों का कमाल देखने को मिला है। चीन के वैज्ञानिकों ने ऐसी फ्लेक्सिबल फाइबर चिप्स बनाई है, जो इंसान के बाल जितनी पतली है। इस चिप्स के अंदर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट लगे हुए हैं। वैज्ञानिकों की इस बड़ी उपलब्धि से इलेक्ट्रॉनिक टेक्सटाइल यानी स्मार्ट कपड़े ही कंप्यूटर और डिस्प्ले की तरह काम कर सकेंगे। इतना ही नहीं, इन कपड़ों को मशीन में भी धोया भी जा सकेगा और ये मुलायम और स्ट्रेचेबल भी होंगे।
एससीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, शंघाई की फुडन यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम ने फ्लेक्सिबल फाइबर चिप बनाई है। रिसर्च टीम को पेंग हुइसहेंग ने लीड किया। टीम १० साल से भी ज्यादा समय से यह खोज कर रही थी कि इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को सख्त सिलिकॉन चिप्स से अलग कैसे बनाया जाए। उन्होंने कपड़ों पर चिप्स लगाने की जगह ऐसे कंप्यूटिंग सिस्टम बनाए हैं, जो खुद कपड़े बन जाते हैं।
इतने छोटे होने के बावजूद, इन फाइबर में प्रति सेंटीमीटर १०००,००० ट्रांजिस्टर लगे हैं। यह संख्या आम कंप्यूटर प्रोसेसर में इस्तेमाल होने वाले बहुत बड़े पैमाने के इंटीग्रेशन के बराबर है। अभी लैब में इस्तेमाल हो रही तकनीक से ये फाइबर चिप्स जरूरी कंप्यूटिंग का काम कर सकती हैं। यह चिप एक मिलीमीटर लंबी है। इतनी लंबी फाइबर चिप में हजारों ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते हैं। फाइबर की लंबाई को बढ़ाकर कंप्यूटिंग पावर को भी बहुत बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि एक मीटर लंबी फाइबर में लाखों ट्रांजिस्टर आ सकते हैं, जो क्लासिकल कंप्यूटर के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयु) के बराबर होती है। भविष्य में नैनोमीटर-स्केल की फोटोलिथोग्राफी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके ट्रांजिस्टर की संख्या को और बढ़ाया जा सकता है।
बता दें कि आम तौर पर माइक्रोचिप को सख्त और सपाट सतहों पर बनाया जाता है। लेकिन फुडन यूनिवर्सिटी की टीम ने इसे बदल दिया। उन्होंने सख्त और सपाट सतहों की जगह फ्लेक्सिबल आधार (निचली सतह) का इस्तेमाल किया। इन पर पूरे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बनाए जा सकते हैं। फिर इन सब्सट्रेट (निचली सतह) को धागे की तरह लपेटकर फाइबर इंटीग्रेटेड सर्किट (एफआईसी) बनाए गए। हर फाइबर इंसान के बाल जितना पतला है।
पहले के फाइबर इलेक्ट्रॉनिक्स सिर्फ बिजली पहुंचाने या चीजों को महसूस कर पाते थे। लेकिन ये नए फाइबर पूरी तरह से माइक्रो कंप्यूटर सिस्टम की तरह काम करते हैं। हर धागे में रेसिस्टर, कैपेसिटर, डायोड और ट्रांजिस्टर लगे होते हैं। यह सिस्टम डिजिटल और एनालॉग सिग्नल दोनों को प्रोसेस कर सकता है। वैज्ञानिकों ने इन फाइबर को ऐसी परिस्थितियों में काम करते रहने के लिए बनाया है, जिसमें सख्त चिप्स आसानी से खराब हो जाती हैं।


टेस्टिंग में, इन एफआईसीस् को १०,००० से ज्यादा बार मुड़ा और रगड़ा गया। ये ३० प्रतिशत तक खिंच सकते हैं और १८० डिग्री तक मुड़ सकते थे। इतना ही नहीं, ये १०० से ज्यादा बार धोने के बाद भी काम करते रहे। ये १०० डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को झेल सके और १५.६ टन के ट्रक के नीचे दबने के बाद भी ठीक से काम करते रहे। इन टेस्टिंग के बाद टीम ने एक ही फाइबर में बिजली सप्लाई, सेंसिंग, कंप्यूटिंग और डिस्प्ले का काम जोड़ा है। इससे स्मार्ट कपड़ों में भारी-भरकम चिप्स या तारों की जरूरत नहीं होगी।

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