नेताजी की स्मृतियों से समृद्ध ‘बोस हाउस’ रामकृष्ण मिशन को हस्तांतरित

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हुगली(पश्चिम बंगाल): कहा जाता है कि एक समय नेताजी सुभाषचंद्र बोस इस घर में कई बार आए थे। हुगली के रिशड़ा क्षेत्र में स्थित नेताजी की स्मृतियों से समृद्ध इस ‘बोस हाउस’ को टायर रबर केमिकल समूह के प्रमुख परितोष मोहन चक्रवर्ती ने रामकृष्ण मिशन को सौंप दिया है।
गंगा के तट पर रमणीय वातावरण में स्थित साढ़े दो बीघा से अधिक क्षेत्रफल वाला यह बागान–घर नेताजी के बड़े भाई शरतचंद्र बोस का था। इस घर में चार कमरे हैं और पूरा इलाका हरियाली से घिरा हुआ है। बाद में यह बागान–घर एक कारखाने के स्वामित्व में चला गया। उन्होंने घर के पास गंगा नदी पर एक जेटी का निर्माण किया था। कारखाने के काम के लिए जहाजों के माध्यम से नमक यहां लाया जाता था।
वर्ष २००५ में यह घर पी.एम.सी. के स्वामित्व में आया। इसके बाद से अब तक वे इस घर का संरक्षण करते आ रहे थे। यह घर कई बार हाथ बदला। घर के मालिक इसे रामकृष्ण मिशन को सौंपना चाहते थे। नेताजी की स्मृतियों से समृद्ध इस ऐतिहासिक घर को ऐसे किसी संस्थान की जिम्मेदारी में देना चाहते थे, जो इस स्थान की गरिमा को अक्षुण्ण रख सके।
बेलूर स्थित रामकृष्ण–विवेकानंद मठ के अधिकारी इस ऐतिहासिक घर का संरक्षण करेंगे। वहां नेताजी और स्वामी विवेकानंद से संबंधित एक संग्रहालय बनाया जाएगा। साथ ही छात्रों की पढ़ाई के लिए एक शैक्षणिक संस्था स्थापित करने की भी योजना है।
टायर के रबर निर्माण में उपयोग होने वाले रसायनों का उत्पादन रिशड़ा स्थित पी.एम.सी. के कारखाने में किया जाता है। हैदराबाद में भी उस कंपनी का एक कारखाना है। नेताजी की स्मृतियों से जुड़े इस बागान–घर को बेलूर रामकृष्ण मिशन को सौंपे जाने से रिशड़ा के आम लोग और इतिहास अध्ययन से जुड़े लोग अत्यंत प्रसन्न हैं।

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