भारी आवाज़ से हृदय शल्य चिकित्सा तक

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फोर्टिस अस्पताल में जीवन रक्षक जटिल हार्ट सर्जरी

कोलकाता: ७८ वर्षीय एक महिला में लंबे समय से बनी हुई भारी आवाज़ (होर्सनेस) की सामान्य जाँच के रूप में शुरू हुई प्रक्रिया ने अंततः एक दुर्लभ और जानलेवा हृदय रोग का पता लगाया। महिला में एओर्टिक आर्च (महाधमनी चाप) में एक बड़ा एन्यूरिज़्म (असामान्य सूजन) पाया गया, जो हृदय से मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों तक रक्त पहुँचाने वाली मुख्य रक्त वाहिका है। फोर्टिस अस्पताल, आनंदपुर के कंसल्टेंट – कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, डॉ. संजय सेनगुप्ता के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने एओर्टिक आर्च पर ८ घंटे लंबी अत्यंत चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। एओर्टिक आर्च में सूजन, जिसे एओर्टिक आर्च एन्यूरिज़्म कहा जाता है, दुर्लभ मानी जाती है और कुल मामलों के १० प्रतिशत से भी कम होती है, लेकिन इसमें फटने और स्ट्रोक का खतरा बहुत अधिक होता है।
मरीज कई दिनों से लगातार भारी आवाज़ के साथ ऊपरी छाती और गर्दन में दर्द से पीड़ित थीं। उनका हाल ही में हल्का स्ट्रोक होने और पूर्व में सेरेब्रोवास्कुलर घटना का भी चिकित्सकीय इतिहास था, जिससे वे अत्यंत उच्च जोखिम श्रेणी में आ गईं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद की गई विस्तृत जाँच में उनके हृदय की एओर्टिक आर्च में एक बड़ी असामान्य सूजन पाई गई, जो वोकल कॉर्ड्स को सप्लाई करने वाली नस पर दबाव डाल रही थी और इसी कारण आवाज़ भारी हो रही थी। जो समस्या शुरुआत में सामान्य आवाज़ से जुड़ी प्रतीत हो रही थी, वह वास्तव में एक गंभीर और जानलेवा हृदय आपातकाल साबित हुई, जिसे मरीज की उम्र और पूर्व स्ट्रोक्स ने और जटिल बना दिया।
बढ़ी हुई एओर्टिक आर्च से मस्तिष्क तक छोटे-छोटे थक्के पहुँचने का खतरा भी बढ़ गया था, जिससे आगे स्ट्रोक होने की आशंका थी। सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति को सावधानीपूर्वक स्थिर किया और विस्तृत न्यूरोलॉजिकल आकलन किया। अत्यधिक जोखिम के बावजूद मरीज को सर्जरी के लिए फिट पाया गया। चिकित्सकीय टीम ने एओर्टिक आर्च के क्षतिग्रस्त हिस्से को सर्जरी द्वारा हटाकर उसकी जगह एक कृत्रिम ग्राफ्ट लगाया। ऑपरेशन के दौरान कुछ समय के लिए रक्त प्रवाह को रोका गया, जबकि नियंत्रित कूलिंग तकनीकों के माध्यम से मस्तिष्क की सुरक्षा की गई। सर्जरी सफल रही और मरीज को एक सप्ताह के भीतर स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस बारे में जानकारी देते हुए डॉ. संजय सेनगुप्ता, कंसल्टेंट – कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, फोर्टिस अस्पताल, आनंदपुर ने कहा, “एओर्टिक आर्च की सर्जरी हृदय की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है, क्योंकि इसमें रक्त प्रवाह को अस्थायी रूप से रोकते हुए मस्तिष्क की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी कुछ समय तक धीमी रही और वे दो दिनों तक बेहोश रहीं। हालांकि तीसरे दिन उनकी स्थिति में नाटकीय सुधार हुआ, उन्होंने होश में आकर वेंटिलेटर सपोर्ट से बाहर आकर स्पष्ट रूप से बोलना शुरू किया। चौथे दिन तक वे पूरी तरह सतर्क, बातचीत करने में सक्षम और न्यूरोलॉजिकल रूप से स्थिर थीं। इसके बाद उनकी स्थिति लगातार बेहतर होती गई और सातवें दिन उन्हें स्थिर अवस्था में छुट्टी दे दी गई। आज मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रही हैं।”
फोर्टिस अस्पताल, आनंदपुर के फैसिलिटी डायरेक्टर श्री आशीष मुखर्जी ने कहा, “यह मामला फोर्टिस अस्पताल, आनंदपुर की उच्च जोखिम और जटिल हृदय एवं वैस्कुलर सर्जरी को सफलतापूर्वक संभालने की विशेषज्ञता को दर्शाता है। उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर, अनुभवी विशेषज्ञों और निर्बाध मल्टीडिसिप्लिनरी टीमवर्क के साथ, यह अस्पताल एक बार फिर कार्डियक केयर में उत्कृष्टता के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करता है।”

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