कोलकाता: नारायणा हेल्थ कोलकाता पूर्वी भारत का एकमात्र ऐसा केंद्र है, जहां समर्पित थोरासिक–वैस्कुलर टीम जटिल फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के लिए समन्वित उपचार प्रदान करती है। यह सहयोगात्मक मॉडल थोरासिक सर्जरी, वैस्कुलर सर्जरी, पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, रेस्पिरेटरी फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन सेवाओं को एक संरचित क्लिनिकल पाथवे के अंतर्गत जोड़ता है— जिससे निदान से लेकर रिकवरी तक निरंतर और समग्र देखभाल सुनिश्चित होती है।
फेफड़ों की संपूर्ण देखभाल को और मजबूत करते हुए, नारायणा हेल्थ कोलकाता ने एडवांस लंग केयर एंड ट्रांसप्लांट इनिशिएटिव्स(एएलसीएटीआई) क्लिनिक की औपचारिक शुरुआत की, जो नारायणा आरएन ट्यागोर अस्पताल (मुकुन्दपुर), नारायणा अस्पताल (हावड़ा) और नारायणा अस्पताल(बारासात) में आयोजित किया जाएगा।
एएलसीएटीआई क्लिनिक का उद्देश्य उन्नत फेफड़ों की बीमारियों और प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) की आवश्यकता वाले मरीजों के लिए विशेष, बहुविषयी मूल्यांकन और उपचार प्रदान करना है।
लॉन्च के अवसर पर, इन क्लिनिकों में परामर्श नि:शुल्क रहेगा ताकि मरीज समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित हों।
एएलसीएटीआई क्लिनिक की तिथियां:
● प्रत्येक माह का दूसरा शुक्रवार – नारायणा अस्पताल, हावड़ा
● प्रत्येक माह का तीसरा शुक्रवार – नारायणा आरएन टैगोर अस्पताल, मुकुंदपुर
● प्रत्येक माह का चौथा शुक्रवार – नारायणा अस्पताल, बारासात
थोरासिक–वैस्कुलर टीम एएलसीएटीआई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें पल्मोनोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, नर्स और रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम मिलकर मरीजों की यात्रा को पूर्ण रूप से देखती है—निदान से लेकर उपचार, ऑपरेशन के बाद की देखभाल और दीर्घकालिक श्वसन पुनर्वास तक।
यह टीम-आधारित दृष्टिकोण विशेष रूप से उन स्थितियों में महत्वपूर्ण है, जहाँ थोरासिक और वैस्कुलर बीमारियाँ एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं, जैसे फेफड़ों का कैंसर, एयरवे स्टेनोसिस, मीडियास्टाइनल ट्यूमर, थोरासिक ट्रॉमा, एऑर्टिक एन्यूरिज्म और छाती की रक्त वाहिकाओं की जटिलताएँ।
अलग-अलग विभागों में भटकने की बजाय, मरीजों को एकीकृत थोरासिक–वैस्कुलर यूनिट में संयुक्त मूल्यांकन, सर्जरी की योजना और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल एक ही स्थान पर मिलती है।
प्रोफेसर (डॉ.) अमिताभ चक्रवर्ती, क्लिनिकल लीड एवं सीनियर कंसल्टेंट – थोरासिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, नारायणा हेल्थ, कोलकाता ने कहा:
“कई मरीज ऐसे होते हैं जिनकी बीमारी एक ही विशेषज्ञता में नहीं आती। जब बीमारी फेफड़ों और बड़ी रक्त वाहिकाओं दोनों को प्रभावित करती है, तो उपचार की योजना भी संयुक्त रूप से बनानी पड़ती है। हमारी ताकत यही है कि हम एक इकाई के रूप में मूल्यांकन, ऑपरेशन, मॉनिटरिंग और रिहैबिलिटेशन करते हैं। इससे न केवल परिणाम बेहतर होते हैं बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के लिए अनुभव भी सुरक्षित और सहज होता है।”
डॉ. मनुजेश बंद्योपाध्याय,
कंसल्टेंट – थोरासिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, नारायणा हेल्थ, कोलकाता ने कहा: “कई अस्पतालों में मरीजों को छाती के लिए एक विशेषज्ञ और रक्त वाहिकाओं के लिए दूसरे विशेषज्ञ से मिलना पड़ता है, जिससे देरी और भ्रम पैदा होता है। यहाँ, शुरुआत से ही दृष्टिकोण सहयोगात्मक है। हमारा ध्यान केवल सर्जरी पर नहीं, बल्कि मरीज को तैयार करने, रिकवरी को समर्थन देने और दीर्घकालिक श्वसन एवं वैस्कुलर स्वास्थ्य बनाए रखने पर भी है।”
क्लिनिकल उपलब्धियाँ और उल्लेखनीय मामले:
नारायणा आरएन टैगोर अस्पताल (मुकुंदपुर), नारायणा अस्पताल (हावड़ा) और नारायणा अस्पताल (बारासात) की टीम ने अब तक कई जटिल मामलों का सफल इलाज किया है।
इनमें शामिल हैं:
● ३९ वर्षीय मरीज, जिसे बुलस लंग डिजीज था, का रोबोटिक बुलेक्टॉमी द्वारा सफल इलाज किया गया। ● एक युवा महिला, जिसे द्विपक्षीय सर्वाइकल रिब्स के कारण आर्टेरियल थोरासिक आउटलेट सिंड्रोम हुआ था।
● २४ वर्षीय युवक, जिसका एंटीरियर मीडियास्टाइनल जर्म सेल ट्यूमर हटाया गया।
● ६२ वर्षीय मरीज, जिसका प्रारंभिक चरण का फेफड़ों का कैंसर रोबोटिक-सहायता प्राप्त लोबेक्टॉमी से सफलतापूर्वक इलाज किया गया।
यह पूर्वी भारत का एकमात्र अस्पताल है जहाँ रोबोटिक लंग कैंसर सर्जरी की जाती है जो मिनिमली इनवेसिव थोरासिक ऑन्कोलॉजी में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बाल चिकित्सा विभाग में उपलब्धियाँ:
२ वर्षीय बच्चे, जिसे एम्पायमा और कई रप्चर लंग एब्सेस थे, का सफल भ्याटस डेकोर्टिकेशन नारायणा अस्पताल, हावड़ा में किया गया।
इसी प्रकार, नारायणा अस्पताल, बारासात में २२ वर्षीय छात्र, जिसे संक्रमित पोस्ट-ट्रॉमेटिक चेस्ट वॉल हीमैटोमा और एम्पायमा था, का यूनिपोर्टल भ्याटस सर्जरी द्वारा पूर्ण रूप से इलाज हुआ और वह शीघ्र सामान्य जीवन में लौट आया।
ये सभी उदाहरण दर्शाते हैं कि मिनिमली इनवेसिव सर्जरी, बहुविषयी सहयोग और मरीज-केंद्रित देखभाल ने नारायणा हेल्थ कोलकाता के एएलसीएटीआई को एक सशक्त और एकीकृत फेफड़ों की देखभाल केंद्र बना दिया है।
यह केंद्र पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पूर्वोत्तर भारत और पड़ोसी देशों से आने वाले मरीजों को उन्नत थोरासिक और वैस्कुलर उपचार प्रदान कर रहा है।










