द वीमेन वॉकिंग विद पर्पस — आईएमआई ग्लोबल कॉन्फ़्रेंस में महिला उद्यमशीलता विषयक पैनल चर्चा

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कोलकाता: अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान (आईएमआई), कोलकाता में महिला नेतृत्व, देखभाल (केयरगिविंग) और मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित महिला उद्यमशीलता विषयक एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में सफल महिला नेताओं और नीतिनिर्माताओं ने अपनी व्यक्तिगत यात्राएँ, व्यावसायिक अनुभव और जीवन से प्राप्त शिक्षाएँ साझा कीं।
“पर्पस-ड्रिवन वीमेन लीडर्स: रिडिज़ाइनिंग इंडिया’ज़ डेवलपमेंट स्टोरी” शीर्षक वाली इस चर्चा में मनोचिकित्सक डॉ. मिनु बुधिया (संस्थापक, केयरिंग माइंड्स इंटरनेशनल और आई कैन फ्लाई इंटरनेशनल स्कूल), सुश्री प्रियतर्शिनी भट्टाचार्य (आईएएस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पश्चिम बंगाल सरकार), सुश्री सनाया मेहता व्यास (डायरेक्टर, सेलवेल वन ग्रुप) और सुश्री मंजीर चटर्जी (संस्थापक, फल्क् प्राेडक्ट्स) ने भाग लिया। सत्र का संयोजन आईएमआई की संगठनात्मक व्यवहार एवं एचआर विभाग की प्रोफेसर डॉ. सोनी अग्रवाल ने किया।
अपनी जीवन-यात्रा पर विचार करते हुए डॉ. मिनु बुधिया ने कहा, “खाली गिलास से आप किसी और को कुछ नहीं दे सकते। पहला कदम आत्म-देखभाल है। यह बात मैंने जीवन के अनुभव से भी सीखी है और एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के रूप में भी। जब चुनौती आती है, सबसे पहले उसे स्वीकार करना ज़रूरी है, तभी उस चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। जब मुझे पता चला कि मेरी छोटी बेटी प्राची को एडीएचडी, कम आईक्यू और बाइपोलर डिसऑर्डर है, तब शुरू में मैं समाधान की तलाश में दुनिया भर में भागती रही। लेकिन जिस दिन मैंने उसे वैसे ही स्वीकार कर लिया, जिसने मेरे जीवन को
विशेष उद्देश्य दिया और उसी दिन मैंने उन बच्चों और परिवारों की मदद का अवसर देखा, जो गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आसान पहुँच न होने के कारण बहुत कष्ट झेल रहे हैं।”
मुख्य वक्तव्य डैम ज़ीरो ऐप वैली कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री सुरेश कुमार, आईएएस ने दिया। उन्होंने नेट-ज़ीरो चुनौती और जलवायु कार्रवाई में डिजिटल प्रौद्योगिकी के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग को “गुणक” (मल्टिप्लायर) के रूप में कैसे अपनाया जा सकता है, इस पर प्रकाश डाला।
सुश्री प्रियतर्शिनी भट्टाचार्य, आईएएस ने कहा, “जब मैं आईएलओ में काम कर रही थी, मेरा जीवन बहुत सहज था; फिर भी भीतर कहीं एक खालीपन महसूस होता था। मुझे लगता था कि अपने देश के लिए कुछ करना चाहिए। स्वयं-सहायता समूह महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं, उन्हें विकल्प और स्वायत्तता दे रहे हैं, जो उन्हें गरिमा प्रदान करता है। विद्यार्थियों से कहना चाहती हूँ: किसी के प्रभाव में आकर तुरंत सहमत मत होइए। पूछिए, सवाल कीजिए, जिज्ञासा बनाए रखिए।”
सुश्री मंजीर चटर्जी ने कहा, “सहयोग ही सबसे महत्वपूर्ण है। हम ग्रामीण क्षेत्रों या अपनी जड़ों को भूलकर आगे नहीं बढ़ सकते। कौशल को कार्यात्मक डिज़ाइन और बाज़ार से जोड़कर मजबूत करना होगा।”
सुश्री सनाया मेहता व्यास ने कहा, “अगर कुछ आपको आकर्षित करे, तो पहले ‘हाँ’ कहिए, बाकी विवरण बाद में सुलझ जाते हैं। शारीरिक फिटनेस मेरी प्राथमिकता है, लोगों से मिलना हो तो मैं खाने की मेज़ पर बैठकर नहीं, बल्कि चलते-चलते मिलना ज़्यादा पसंद करती हूँ।”

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