मुंबई: कभी भारतीय क्रिकेट का सबसे चमकदार उभरता सितारा माने गए पृथ्वी शॉ बीते कुछ वर्षों में फॉर्म, फिटनेस और विवादों के कारण कठिन दौरबाट गुजर रहे हैं। अपने करियर को नई दिशा देने के उद्देश्य से उन्होंने २०२५–२६ घरेलू सीजन से पहले मुंबई छोड़कर महाराष्ट्र का दामन थामा है।
बुधवार शुरू हुई सैयद मुश्ताक अली टी-२० ट्रॉफी को पृथ्वी अपने कमबैक के लिए सबसे बड़ा मौका मान रहे हैं। राष्ट्रीय टीम में मौजूद रुतुराज गायकवाड़ ग्रुप चरण में उपलब्ध न होने के कारण इस टूर्नामेंट में महाराष्ट्र की कप्तानी का जिम्मा पृथ्वी को मिला है।
पिछली आईपीएल नीलामी में किसी भी टीम ने उन पर बोली नहीं लगाई थी। ऐसेमा पृथ्वी इस टूर्नामेंट को आईपीएल २०२६ की मिनी नीलामी से पहले अपनी उपयोगिता साबित करने का महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मानते हैं। दिल्ली कैपिटल्स से सात सीजन में उन्होंने १४७ की स्ट्राइकरेट के साथ १८९२ रन बनाए हैं। पावरप्ले में आक्रामक शुरुआत दिलाने की उनकी क्षमता अब भी प्रभावी मानी जाती है।
महज १८ वर्ष की उम्र में टेस्ट पदार्पण कर पहली ही इनिंग में शतक लगाने वाले पृथ्वी के पास प्रतिभा की कमी नहीं है। यदि वह पुराना फॉर्म वापस पा सके तो आईपीएल में उनकी वापसी लगभग तय मानी जा रही है। फिलहाल उन्हें सही मानसिकता और निरंतर अवसर की जरूरत है, जिसे मुश्ताक अली ट्रॉफी पूरा कर सकती है।










