कोलकाता: भारत के अग्रणी कैंसर उपचार संस्थान अपोलो कैंसर सेंटर्स (एसीसी) ने पेट के कैंसर के प्रारंभिक पता लगाने पर केन्द्रित एक विशेष कार्यक्रम ‘सेव माई स्टमक (एसएमएस)’ की शुरुआत की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पेट के कैंसर को लेकर देशभर में जागरूकता फैलाना, लोगों को समय पर जाँच के लिए प्रेरित करना तथा सही समय में उपचार सुनिश्चित करना है।
पेट का कैंसर अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण तब दिखाई देते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इसलिए विशेषज्ञों ने इस कार्यक्रम को भारत में समय पूर्व पहचान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
ग्लोबोकैन २०२० के अनुसार पेट का कैंसर दुनिया का पाँचवाँ सबसे आम कैंसर है, जबकि भारत में इसकी हिस्सेदारी ४.५% है। एक अध्ययन में पूर्वी भारत में दर्ज मामलों में से ७०% मरीज पुरुष पाए गए। मिज़ोरम में पुरुष-महिला अनुपात २.३:१, जबकि कश्मीर में यह ३.३:१ था।
ये आँकड़े दर्शाते हैं कि कुछ क्षेत्रों में पुरुषों पर इसका खतरा अधिक है और वहाँ जागरूकता तथा प्रारंभिक जाँच अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि जल्द पहचान होने पर पेट के कैंसर का उपचार अधिक प्रभावी होता है और जीवित रहने की दर कई गुना बढ़ जाती है।









