गोवा: भारत के सबसे प्रतिष्ठित फ़िल्म समारोहों में से एक ५६वां इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऑफ़ इंडिया (आइएफएफआई) २०२५ का गोवा की राजधानी पंजिम में बेहद भव्य और रंगारंग शुरुआत हुई। ओपनिंग सेरेमनी में देशभर की विविध संस्कृति को दर्शाती कई प्रस्तुतियाँ और झांकियाँ शामिल रहीं, जिन्होंने दर्शकों का खूब ध्यान खींचा।
इस वर्ष उद्घाटन समारोह में एक अनोखी परंपरा देखने को मिली। गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू और मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने तुलसी के पौधे को पानी देकर फेस्टिवल की शुरुआत की—जो पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता का प्रतीक माना जा रहा है।
समारोह का मुख्य आकर्षण रहा एक कार्निवल-स्टाइल परेड, जिसमें अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस ने सिनेमा से प्रेरित झांकियाँ पेश कीं।
नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएफडीसी) ने अपने ५० वर्ष पूरे होने पर जाने भी दो यारों, द लंचबॉक्स और कई चर्चित फ़िल्मों के पोस्टरों से सजी झांकी प्रस्तुत की। इसके अलावा महावतार नरसिम्हा को समर्पित विशेष झांकी ने भी दर्शकों की खूब तालियाँ बटोरीं।
मुख्यमंत्री सावंत ने अपने संबोधन में गोवा को भारत का प्रमुख फ़िल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बताते हुए कहा कि राज्य का आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और फिल्ममेकर्स के लिए अनुकूल नीतियों ने गोवा की वैश्विक पहचान को और मज़बूत किया है। उन्होंने सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और फ़िल्म फ़ाइनेंस स्कीम जैसे सुधारों का भी उल्लेख किया।
राज्यपाल राजू ने अपने पहले आइएफएफआई अनुभव को साझा करते हुए कहा कि इस वर्ष फेस्टिवल में ८४ देशों की २७० फ़िल्में प्रदर्शित होंगी। उन्होंने गोवा को आइएफएफआई का स्थायी केंद्र बनाने में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के योगदान को भी याद किया।
उद्घाटन कार्यक्रम में बर्लिन फ़िल्म फ़ेस्टिवल २०२५ में ग्रैंड जूरी प्राइज जीत चुकी ब्राज़ीलियन फ़िल्म ‘द ब्लू ट्रेल’ की स्क्रीनिंग भी हुई।
आइएफएफआई २०२५ का समापन २८ नवंबर को ग्रैंड क्लोज़िंग सेरेमनी के साथ होगा, जबकि वेव्स फ़िल्म बाजार २४ नवंबर तक चलेगा।










