विश्व डायबिटीज़ दिवस पर मणिपाल हॉस्पिटल्स कोलकाता की खास पहल

IMG-20251113-WA0017

ढाकुरिया में ‘मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज़’ का शुभारंभ और ईएम बाइपास में जागरूकता अभियान

कोलकाता: मणिपाल हॉस्पिटल्स ढाकुरिया और ईएम बाइपास, जो भारत के सबसे बड़े हेल्थकेयर नेटवर्क, मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की प्रमुख इकाइयाँ हैं ने विश्व डायबिटीज़ दिवस के अवसर पर दो महत्वपूर्ण पहलें कीं। ढाकुरिया इकाई में मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज़ की शुरुआत की गई, जबकि ईएम बाइपास इकाई में एक विशेष डायबिटीज़ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर ओलंपियन शूटर और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित श्री जॉयदीप कर्माकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों कार्यक्रमों का उद्देश्य था — समय पर जांच, जीवनशैली में सुधार और डायबिटीज़ के बेहतर प्रबंधन के महत्व पर ज़ोर देना।
डायबिटीज़ आज एक वैश्विक समस्या बन चुकी है और इसे “२१वीं सदी की महामारी” भी कहा जाता है। दुनिया भर में लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। समय पर पहचान, सही इलाज और लगातार निगरानी रखना बहुत ज़रूरी है ताकि लंबी अवधि की जटिलताओं को रोका जा सके। भारत में बढ़ते मामलों को देखते हुए अब विशेष देखभाल और जनजागरूकता की सख्त ज़रूरत है।
मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज़ ढाकुरिया में शुरू किया गया है, जहाँ एक अनुभवी विशेषज्ञों की टीम मरीजों को एक ही छत के नीचे जांच, इलाज और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगी। इस टीम में प्रमुख डॉक्टर शामिल हैं –
डॉ. सुजॉय घोष, कंसल्टेंट – एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. अमल कुमार सिन्हा, कंसल्टेंट – डायबिटीज़ एवं एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. मनोजित केतन मुखोपाध्याय, सीनियर कंसल्टेंट – एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. अनिर्बन सिन्हा, कंसल्टेंट – एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. उमाकांत महापात्र, कंसल्टेंट – एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. सोहम तारफदार, कंसल्टेंट – एंडोक्राइनोलॉजी, और डॉ. शिलादित्य नंदी, कंसल्टेंट – एंडोक्राइनोलॉजी।
यह संस्थान मरीजों को शिक्षा और जागरूकता देने पर विशेष ध्यान देगा ताकि वे अपने स्वास्थ्य की देखभाल खुद भी बेहतर तरीके से कर सकें।
लॉन्च के अवसर पर डॉ. सुजॉय घोष, कंसल्टेंट – एंडोक्राइनोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल ढाकुरिया ने कहा,
“डायबिटीज़ अब किसी एक उम्र तक सीमित नहीं रही है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग, सभी प्रभावित हो रहे हैं। भारत में १० करोड़ से ज़्यादा लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए हमने मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज़ की शुरुआत की है, जहाँ उन्नत जांच, विशेषज्ञ इलाज और जीवनशैली मार्गदर्शन एक ही स्थान पर मिल सके। हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति समय रहते बीमारी की पहचान करे, सही उपचार ले और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाए।”
ईएम बाइपास इकाई में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कई रोचक गतिविधियाँ हुईं। सबसे खास रही ‘शुगर मॉन्स्टर’ की प्रदर्शनी, जिसमें आम खाने-पीने की चीज़ों में छिपी शक्कर की मात्रा को दिखाया गया। इससे लोगों को यह समझने में मदद मिली कि छोटी-छोटी आदतें कैसे डायबिटीज़ का कारण बन सकती हैं। कार्यक्रम में डायबिटीज़ अवेयरनेस बुकलेट और जानकारी पोस्टर भी जारी किए गए, जिनमें लक्षण, बचाव और जीवनशैली सुधार के तरीके बताए गए।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख डॉक्टर थे –डॉ. सुभंकर चौधरी, सीनियर कंसल्टेंट और विभागाध्यक्ष, डायबिटोलॉजी एवं एंडोक्राइनोलॉजी, डॉ. उत्तियो गुप्ता, कंसल्टेंट, डॉ. कौशिक विश्वास, सीनियर कंसल्टेंट, और डॉ. एस. के. हम्मादुर रहमान, कंसल्टेंट, मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास। उन्होंने लोगों के साथ बातचीत कर डायबिटीज़ की रोकथाम और नियंत्रण के उपाय साझा किए।
डॉ. सुभंकर चौधरी ने कहा, “डायबिटीज़ सिर्फ एक बीमारी नहीं है, यह हमारी बदलती जीवनशैली का भी संकेत है। पहले इसका ध्यान केवल इलाज पर था, अब फोकस जागरूकता और रोकथाम पर है। समय पर पहचान, एकीकृत देखभाल और लगातार जागरूकता बहुत ज़रूरी है। मणिपाल हॉस्पिटल में हम इसी सोच के साथ काम करते हैं ताकि हर व्यक्ति को शिक्षा, सहयोग और सही इलाज मिल सके।”
मुख्य अतिथि श्री जॉयदीप कर्माकर ने कहा, “यह देखकर अच्छा लगा कि मणिपाल हॉस्पिटल्स जैसी अग्रणी संस्था अस्पताल से बाहर निकलकर लोगों तक डायबिटीज़ की जागरूकता पहुँचा रही है। ऐसे प्रयास समाज को स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। फिटनेस और जागरूकता, दोनों एक साथ चलने चाहिए।”
दिन का समापन ईएम बाइपास इकाई में हुआ, जहाँ मुख्य अतिथि ने अस्पताल की इमारत को नीली रोशनी से जगमगाया, जो विश्व डायबिटीज़ दिवस की वैश्विक एकता का प्रतीक है। वहीं ढाकुरिया इकाई की इमारत को १० से १६ नवम्बर तक नीली रोशनी से सजाया गया, जिससे उनकी डायबिटीज़ जागरूकता के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता झलकी।

About Author

[DISPLAY_ULTIMATE_SOCIAL_ICONS]

Advertisement